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नकली रत्नों का बढ़ता चलन

नकली रत्नों का बढ़ता चलन

पिछले एक दशक में ज्योतिष का जिस तरह प्रचार और प्रसार हुआ है, अखबार हो या टीवी चैनल, हर जगह ज्योतिष का कालम मिल जाएगा |

ज्योतिष का रत्नों से गहरा सम्बन्ध है | ज्योतिष की बात होगी तो उपाय के रूप में प्रमुख रूप से रत्नों का नाम आएगा | यदि भगवान् ने ग्रहों को बनाया है उनके अच्छे बुरे प्रभाव की व्यवस्था की है तो बुरे ग्रहों के निवारण के लिए रत्न भी धरती पर दिए हैं |

रत्नों का प्रयोग करने वाले लोगों में वे लोग भी हैं जो केवल सजावट के लिए रत्न पहनते हैं | कुछ समय से रत्नों के बाजार में तेजी आई है | लोगों की आवश्यकताएं बढेंगी तो पूर्ती के लिए विकल्प भी देखने को मिलेंगे | इसी के चलते नकली रत्न या सस्ते रत्नों को महंगा करके बेचा जाने लगा है |

इस लेख में मैं आपका परिचय कुछ ऐसे तथ्यों से करवाने जा रहा हूँ जिन्हें जानकार न केवल आप जागरूक हो जायेंगे बल्कि किसी के लिए आपको ठगना भी मुश्किल हो जाएगा |

माणिक

यह रत्न दस रूपये रत्ती से लेकर दौ सौ रुपये रत्ती तक किसी छोटी दूकान में भी उपलब्ध रहता है | अधिक महंगा नहीं है परन्तु जो इस रत्न की पहचान करना जानते हैं उन्हें पता होगा कि जितनी पारदर्शिता इस रत्न में होगी उतना ही महंगा मानिक होगा |

मानिक की खान से निकलने वाले बेकार टुकड़ों को अब प्रयोग में लाया जाने लगा है | रत्न का परीक्षण करने पर नकली आ ही नहीं सकता क्योंकि असली रत्न के टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है | हलके रंग के माणिक को जोबन देकर उसे ऐसा रंग दे दिया जाता है कि पचास से साठ रूपये रत्ती के हिसाब के हिसाब से आसानी से बिक जाए |

यदि एक रत्न सामने रखा जाए तो इसका पता लगाना मुश्किल होता है | रंग कभी जाता नहीं और थोड़ी बहुत जांच में कुछ पता चलता नहीं |

अधिकतर ज्योतिषी रत्न स्वयं खरीदने लगे हैं | उन्हें आसानी से धोखा देने के लिए इस तरह का बाजार सजाया जाने लगा है | खूबसूरत रत्नों के शौक़ीन रंग देखकर तुरंत ऐसे मानिक को खरीद लेते हैं |

आगे पढ़िए कैसे तैयार होता है नकली मोती – The Chinese Pearl

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