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जीवन साथी की जन्मकुंडली

जीवन साथी की जन्मकुंडली

अधिकतर लोग अपने पार्टनर के विषय में यह मानते हैं कि मुझे सब मालूम है | प्यार में विशवास जरूरी है, यही विशवास प्रेम को मजबूत बनाता है | विशवास जितना गहरा होगा उतनी ही लम्बी उम्र आपके प्यार की रहेगी | फिर भी यही विशवास एकमात्र चीज है जो आपको प्रेम में बंधे रखता है |

एक दुसरे के प्रति विशवास होना आवश्यक है परन्तु अंधविश्वास भी नहीं होना चाहिए | क्योंकि यदि आपका विशवास ही आपके पार्टनर की शक्ति है तो उसके दुरूपयोग की संभावना बढ़ जाती है | यदि आपको अपने पार्टनर पर पूर्ण विशवास है तो ठीक है परन्तु यदि आप ठगे जा प्रेम में सफल या असफल बना सकती रहे हैं तो मेरा यह लेख आपके लिए ही है | यहाँ यह कहना आवश्यक होगा कि जन्मकुंडली में राहू आपके अन्दर के चोर का प्रतीक होता है | यह आपके लग्न या राशी को जितना अधिक प्रभावित करेगा आप उतने ही कम विश्वासपात्र बनेंगे |

जन्मकुंडली द्वारा आपके पार्टनर की मानसिकता का पता लगाया जा सकता है | कुछ दिनों पहले California से मेरी एक क्लाइंट ने मुझसे अपने भविष्य के बारे में पुछा था | उसकी इच्छा थी यह जानने की कि उसके पार्टनर के साथ उसका भविष्य कैसा रहेगा | शादी के लिए दोनों राजी थे और लड़की चाहती थी कि वह शादी के बाद भी विदेश में ही सेटल रहे जिसके लिए उसका प्रेमी उस समय तक राजी था | फिर भी मैंने सलाह दी कि प्रेम विवाह के लिए जितनी आग आपमें दिखाई दे रही है उतनी आपके पार्टनर की जन्मकुंडली में नहीं है | विवाह के लिए दोनों पक्षों में उत्साह हो तो दीखता है परन्तु जन्मकुंडली देखते ही मैंने कहा कि यह व्यक्ति आपसे शादी नहीं करेगा | आज भी दोनों में बातचीत जारी है और विवाह नहीं हो पाया है |

जन्मकुंडली में मंगल उत्साह और Dedication, समर्पण का प्रतीक होता है | यदि मंगल ग्रह राहू या शनि के साथ हो तो समर्पण की भावना, उत्साह और क्रियाशीलता व्यक्ति में कम हो जाती है | कन्फ्यूज सा रहने वाला वह शख्स कोई बड़ा निर्णय लेने के लिए दूसरों पर निर्भर रहने लगता है | यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपमें समर्पण और जिम्मेदारी की भावना हमेशा बलवती रहनी चाहिए |

इसके अतिरिक्त जन्मकुंडली के पांचवें घर में शत्रु ग्रह बैठा हो तो कोई शत्रु आपके पार्टनर को हमेशा आपके विरुद्ध भड़काने में लगा रहेगा और इसी के फलस्वरूप आपके प्रेम विवाह में आपका खुद का मन आपके साथ नहीं होगा | ऐसा मैंने इसलिए कहा है क्योंकि ऐसे उदाहरण ज्योतिषी के समक्ष प्रस्तुत रहते हैं |

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