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दुआ बददुआ और कुंडली का दूसरा घर

दुआ बददुआ और कुंडली का दूसरा घर

एक ज्योतिष विद्यार्थी होते हुए व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मुझे जो प्रेरणा होती है उसे मन में ही न रखते हुए मैं अपने पाठकों तक पहुंचा देता हूँ | वास्तव में भविष्वाणी करने के लिए ज्योतिषी होना अनिवार्य नहीं है | जरूरी नहीं है कि आपको कुंडली पढना आना चाहिए | कभी कभी आम लोगों की बात भी सच होते हुए देखी गई है | आपने देखा होगा कि कई बार किसी व्यक्ति ने अनजाने में कुछ अच्छा या बुरा बोल दिया और वह सच हो गया | आखिर ऐसा क्यों होता है ?

दूसरा घर है आपकी बोलबाणी का

जो मैंने महसूस किया है वह कुछ इस तरह है कि कुंडली का दूसरा भाव या दूसरा घर व्यक्ति की बोल बाणी का है | व्यक्ति की आवाज, बोलने का ढंग या लहजा कैसा है यह दूसरे घर से पता लगाया जा सकता है |

कुछ लोग जुबान के पक्के होते हैं तो उसके लिए उनके दूसरे घर में बैठा सूर्य उन्हें ऐसा बनाता है | कुछ लोग बहुत ही मधुर बोलते हैं तो शुक्र का शुभ प्रभाव उन्हें कुछ बुरा बोलने ही नहीं देता | कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जिनके मुंह से कभी तारीफ़ या शुभ वाणी निकलती ही नहीं तो दुसरे घर के स्वामी का नीच राशि में पाया जाना उसका एक कारण होता है | जो लोग गाली गलौच अधिक करते हैं या दूसरों को कोसते रहते हैं या जिनकी जुबान गन्दी होती है वे दूसरे घर के राहू के प्रभाव से ऐसे होते हैं | उनके जीवन में कड़वाहट किसी न किसी रूप में हर दिन सामने आती है | यदि दूसरे घर के राहू पर शनि या मंगल की दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति का दिया हुआ श्राप भी सच हो जाता है |

दुआ और बददुआ

दूसरे घर पर शुभ प्रभाव से व्यक्ति को आशीर्वाद और शाप देने की शक्ति मिलती है | जो आपके संचित कर्म हैं या जो शुभ कर्म आपने अपने अतीत में किये हैं वे ही आपके मुंह से निकले वाक्य को सफल बनाते हैं | जब हम शुभ कर्म करते हैं तो हमें आशीर्वाद देने की शक्ति प्राप्त होती है | यदि आपने अपने जीवन में किसी के लिए कुछ किया है, किसी की दुआएं ली हैं तो आप जब भी किसी के लिए दुआ करेंगे वह फलीभूत होगी | इसके विपरीत यदि साधारण जिन्दगी आपने जी है, खाया पीया सो गये और केवल अपने परिवार के भरण पोषण के अतिरिक्त आपने कुछ नहीं किया तो आपकी दुआ या बद्दुआ का कोई विशेष प्रभाव नहीं होगा |

यदि आप नियमित पूजा पाठ करते हैं, परोपकार का कोई न कोई काम आप करते रहते हैं और लोगों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं तो आपके ये संचित कर्म आपके एक न एक दिन काम आयेंगे | ये संचित कर्म आपकी जमा पूँजी हैं जिन्हें आपको हर जगह खर्च नहीं करना है | आपके संचित कर्म खर्च होते हैं जब आप किसी को आशीर्वाद देते हैं | इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके संचित कर्म नष्ट भी होते हैं जब आप किसी की निंदा करते हैं | किसी को गाली देना, निंदा या चुगली करना या आपके मुंह से निकले वाक्य से किसी को नुक्सान पहुँचने पर आपके संचित कर्म नष्ट होते हैं |

निष्कर्ष

आज नए वर्ष के अवसर पर आइये संकल्प लें कि प्रतिदिन कुछ ऐसा करना है जिससे दूसरों को लाभ पहुंचे | किसी की निंदा करने की आदत छोड़कर हम यदि परोपकार के उद्देश्य से अपना कर्म करेंगे तो कम से कम इतना तो अवश्य होगा कि हमारी दुआएं काम करने लगेंगी |

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